10 बातें जो आप भारत में कानूनी गर्भसमापन के बारे में नहीं जानते हैं।

भारत में गर्भावस्था की चिकित्सा समाप्ति अधिनियम 1973 ( मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी/एमटीपी) या गर्भसमापन करने के बारे में बहुत सी गलत धारणा या स्पष्टता का अभाव प्रतीत होता है। बहुत सारी महिलाओं को यह पता नहीं है कि गर्भावस्था को समाप्त करना भारत में कानूनी है। जबकि महिलाओं के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि गर्भसमापन कराने के संबंध में उनके क्या अधिकार है और क्या नहीं।

यहां उन 10 चीजों की सूची दी गई है, जिन्हें आप भारत में गर्भसमापन कराने के बारे में नहीं जानते हैंः

1. भारत में गर्भसमापन कानूनी है।

गर्भावस्था के बीस सप्ताह तक कुछ परिस्थितियों में गर्भावस्था का गर्भसमापन या गर्भावस्था की  चिकित्सा समाप्ति की अनुमति है। मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट 1971 के अनुसार, गर्भावस्था को कुछ परिस्थितियों में समाप्त किया जा सकता है। जिनमें निम्न परिस्थितियां शामिल है

  • बलात्कार
  • गर्भवती महिला के स्वास्थ्य के लिए शारीरिक या मानसिक जोखिम
  • विवाहित महिलाओं के मामले में गर्भनिरोधक की विफलता
  • भ्रूण/बच्चे को किसी भी प्रकार की विकलांगता की संभावना
2. महिला को गर्भसमापन के लिए हां या ना कहने का अधिकार है।

गर्भसमापन कानूनी होने के बावजूद, एमटीपी अधिनियम गर्भावस्था को मांग पर समाप्त करने का अधिकार प्रदान नहीं करता है, महिला जबरन गर्भसमापन को ना कहने का विकल्प चुन सकती है। महिला को गर्भावस्था जारी रखने और बच्चा पैदा करने का अधिकार है। कोई भी उसे गर्भसमापन कराने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। गर्भावस्था की चिकित्सय समाप्ति अधिनियम 1973 के अनुसार ऐसा करना एक दंडनीय अपराध है!

3. गर्भसमापन करवाने के लिए आपको केवल आपकी सहमति की आवश्यकता होती है।

यदि आप एक गर्भवती महिला हैं जो गर्भसमापन करवाना चाहती हैं, तो याद रखें कि गर्भसमापन करवाने के लिए केवल आपकी सहमति की आवश्यकता होती है। यदि आपकी आयु 18 वर्ष से अधिक है, तो आपको गर्भसमापन करवाने के लिए किसी और की अनुमति की आवश्यकता नहीं है। यदि किसी अस्पताल में डॉक्टर या अन्य कर्मचारी आपके माता-पिता या पति की सहमति के लिए पूछते हैं, तो उन्हें बताएं कि यह आपका शरीर और आपका अधिकार है।

4. गर्भावस्था के 20 सप्ताह तक गर्भावस्था को समाप्त किया जा सकता है।

गर्भावस्था की चिकित्सय समाप्ति अधिनियम किसी भी गर्भावस्था को गर्भावस्था के 20 सप्ताह के भीतर समाप्त करने की अनुमति देता है। हालांकि, जनवरी 2017 में, सर्वोच्च न्यायालय ने एक बलात्कार पीडिता को 24 सप्ताह में अपनी गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति दी थी क्योंकि भ्रूण को सिर नहीं विकसित हुआ था। यह ध्यान देने योग्य है कि 2014 में तैयार एक संशोधन में गर्भावस्था की समाप्ति सीमा को वर्तमान 20 सप्ताह से 24 सप्ताह तक बढ़ाने की मांग की गई थी।

5. गर्भावस्था की हर समाप्ति भ्रूण हत्या नहीं हो सकती है।

गर्भावस्था की समाप्ति एक भ्रूण हत्या केवल तब है अगर गर्भसमापन लिंग निर्धारण परीक्षण के बाद किया जाता है। पी0सी0पी0एन0डी0टी0 अधिनियम 1994 में लिंग निर्धारण परीक्षणों के आधार पर कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए लागू किया गया था। यदि यह साबित हो जाता है कि गर्भसमापन लिंग निर्धारण परीक्षण के कारण ही किया गया है तो यह दंडनीय अपराध है।

6. 12 सप्ताह की गर्भावस्था के दौरान लिंग निर्धारण संभव नहीं हो सकता है।

यहां लिंग निर्धारण परीक्षण से जुडी बात यह है, कि पी0सी0पी0एन0डी0टी0 अधिनियम लिंग निर्धारण परीक्षण करने वाले तकनीशियन को दंडित करता है। आमतौर पर, गर्भधारण के 12 सप्ताह के भीतर भ्रूण का लिंग निर्धारित नहीं किया जा सकता है। इसलिए 12 सप्ताह की गर्भावस्था के भीतर किए गए गर्भसमापन को लिंग चयन के साथ नहीं जोड़ा जा सकता है। जो बताता है कि, एक महिला को लिंग चयन के लिए मजबूर करना एक दंडनीय अपराध है।

7. केवल एक पंजीकृत चिकित्सिय अभ्यासकर्मी (त्महपेजमतमक उमकपबंस च्तंबजपवदमत ) ही गर्भसमापन कर सकते है।

किसी भी गर्भवती महिला को गर्भसमापन एक पंजीकृत चिकित्सिय अभ्यासकर्मी द्वारा ही करवाना महत्वपूर्ण है। जब आप गर्भसमापन करवाना चाह रहे हों तो यह एक बहुत छोटी बात की तरह लग सकता है लेकिन यह एक महतत्वपूर्ण बात है जिसे बहुत गंभीरता से लिया जाना चाहिए, यह देखते हुए कि असुरक्षित गर्भसमापन कई जटिलताओं को छोड़ सकता है। एम0टी0पी0 एक्ट किसी भी डॉक्टर के लिए पंजीकृत चिकित्सिय अभ्यासकर्मी बनने की आवश्यकताओं को निर्धारित करता है। इसमें यह सुनिश्चित करने के लिए कठोर प्रशिक्षण के कई स्तर शामिल हैं कि डॉक्टर गर्भसमापन करने के लिए योग्य हैं। इसलिए यह जरूरी है कि केवल एक पंजीकृत चिकित्सिय अभ्यासकमी से ही गर्भसमापन करवाया जाए।

8. गर्भसमापन केवल एक सरकारी अस्पताल या जिला स्तरीय समिति द्वारा अनुमोदित स्थान पर ही किया जा सकता है।

गर्भसमापन करने के लिए पंजीकृत चिकित्सिय अभ्यासकर्मी की आवश्यकता के साथ ही, यह भी आवश्यक है कि गर्भसमापन सरकार द्वारा अनुमोदित अस्पताल में ही करवाया जाये। एक गर्भावस्था केवल एक सरकारी अस्पताल या इस उद्देश्य के लिए स्थापित एक जिला स्तरीय समिति द्वारा अनुमोदित अस्पताल में समाप्त करवाई जा सकती है। यदि आप गर्भसमापन कराने के बारे में अनिश्चित हैं कि गर्भसमापन कहां पर होगा तो असुरक्षित गर्भसमापन के कारण उत्पन्न होने वाली किसी भी जटिलता से बचने के लिये नजदीकी सरकारी अस्पताल में जाएं।

9. गर्भपात एक अधिकार नहीं है।

भारत में गर्भसमापन करवाना कानूनी हो सकता है, लेकिन यह एक ऐसा अधिकार नहीं है जो महिलाओं के पास है। इसका क्या मतलब है? इसका मतलब है कि आप मांग पर गर्भसमापन नहीं करवा सकते हैं, जिसका अर्थ है कि एक महिला डॉक्टर से गर्भसमापन करने के लिए नहीं कह सकती है। यह केवल ऊपर वर्णित कारणों में से किसी एक या अधिक के लिए प्राप्त किया जा सकता है।

10. डॉक्टर किसी भी महिला पर गर्भसमापन करने से मना कर सकते हैं।

यह जानते हुए कि गर्भसमापन भारत में एक अधिकार नहीं है, कोई भी डॉक्टर गर्भावस्था को समाप्त करने से इनकार कर सकता है। उदाहरण के लिए, महिला अपनी गर्भावस्था को समाप्त करने के अनुरोध के साथ ही अपनी शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य के लिए जोखिम का उल्लेख कर सकती है। हालांकि जब तक डॉक्टर यह नहीं देखते कि यह वास्तविक जोखिम है, वे गर्भावस्था को समाप्त करने से इनकार कर सकते हैं।

इस मुद्दे पर अधिक सुनने के लिए, हमारे पॉडकास्ट की जांच करें जहां जैस्मीन जॉर्ज, एक वकील और यौन और प्रजनन स्वास्थ्य अधिवक्ता एमटीपी अधिनियम पर चर्चा करते हैं।

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