Period ही normal topic लगने लगा

उत्तम- मेरे स्कूल में Project Khel (PK) ने अप्रैल, 2013 से अपना काम करना start किया | तब मैं 10 साल का था |

संतोष- मैं जिस shelter home में रहता था, वहां पर PK ने मार्च, 2013 से काम करना start किया | तब मैं 11 साल का था |

शुरुआत में तो हम दोनों के सेन्टर में ही मज़ेदार games और sports होते थे, ताकि हमारा relationship बन सके | संतोष को sports में ज़्यादा interest था, तो उसे games और activities boring लगती थी और उत्तम को खेलना कूदना ज़्यादा पसंद नहीं था और उसे लगता था कि PK वाले sports team बनाने आये हैं, तो उसे भी अच्छा नहीं लगता था | हम दोनों उस समय मिले नहीं थे, पर हम दोनों को यह बात अच्छी लगने लगी की कैसे PK टीम के दीदी भैया लोग हमेशा टाइम से आते थे और सिर्फ अपना काम ख़त्म करने के लिए नहीं, बल्कि हमें, हमारे तरीके से life skills सिखाने की कोशिश करते थे | वैसे हम दोनों को वहाँ लगभग एक ही समय पर session दिया गया लेकिन session से हमें क्या मिला यह हम दोनों के लिए अलग था, क्योंकि दीदी भैया लोग सेन्टर के बच्चों के हिसाब से काम करते हैं |

करीब साल भर के बाद, धीरे धीरे संतोष के सेन्टर में topics और गंभीर होने लग गये | कभी-कभी हमसे मिलने के लिए दीदी भैया दूसरे संस्था से लोगों को भी लाते थे | मेरा इन सब चीज़ों में कम ही मन लगता था, लेकिन आज दीदी हमें याद दिलाती हैं कि कैसे कम अच्छा लगने के बावजूद भी मेरे behaviour में बदलाव आने लगा था | 

उत्तम 2014 में अपने स्कूल से graduate होकर दूसरे स्कूल चला गया, लेकिन उसे PK के sessions  बहुत अच्छे लगते थे, इसलिए जब भी उसके school में छुट्टी मिलती थी, वो भाग के PK के एक सेन्टर, जो की उसके घर के पास था, वहाँ चला जाया करता था |

हम दोनों को, 2015 में, दीदी भैया के साथ, अहमदाबाद में हुए एक ultimate frisbee camp में जाने का मौका मिला | उसी trip में हम दोनों पहली बार मिले | वहाँ से वापस आ कर हमे पूरे PK team को frisbee खेलना सिखाना था | यह सब इतने अच्छे से हुआ कि हम दोनों को PK के पहले 2 Youth Leader बनने का मौका मिला | Youth Leaders वो बच्चे होते हैं जो PK के 21st century  Life Skills Programme के graduate या Ultimate Frisbee के senior players होते हैं, जो Part-time facilitator बन के टीम में आते हैं | यह कैंप तो frisbee का था लेकिन इसी camp में एक session ऐसा था जिसमें हमारी अंगना दीदी और camp organizers में से एक दीदी ने periods पर एक workshop किया | उससे पहले हमें periods के बारे में थोड़ा बहुत पता था लेकिन इस workshop के बाद हमारा hesitation काफ़ी हद तक टूटा |

2016 के Global Menstrual Hygiene Day पर, Hindustan Times और Unicef के साथ मिलकर  हमने एक street carnival किया | वहाँ के जितने भी गेम्स PK चला रहे थे, सभी periods की जानकारी से जुड़े थे | हम Youth Leaders भी इस community event में facilitator के तौर पर उतरे | यह बहुत ही अच्छा experience रहा कि कैसे कुछ लोग खुल के सामने आये, और कुछ लोग हमसे बात करने में भी शरमा रहे थे | 

अगर हमारी पूरी journey को ध्यान रखते हुए हम बताये, तो सबसे ज़्यादा फायदा Youth Leaders Trainings से मिला | Feminism, Identity , consent, gender, pluralism जैसे बड़े topics समझ में आने लगे तो period उन सब में से बहुत ही छोटा और normal topic लगने लगा | Period के आस पास अपनी un-developed सोच से हमने जो हव्वा बना रखा है, वो भी समझ आया |

जब हम बच्चे के तौर पर जुड़े थे तब भी हम यह देखते थे कि first aid box में pad रखा रहता था और जब से Youth Leader के तौर पर जुड़े तो खुद भी अपने equipment kit में pad रखना शुरू कर दिया | इससे हमारे लिए pad carry करने का action बिल्कुल normal सा हो गया |

Youth Leader बनने के बाद हमें exposure के कई सारे मौके मिले | संतोष को एक बहुत ही बड़े स्कूल में जाकर लगभग अपने बराबर के बच्चों के साथ session facilitate करने का मौका मिला | उत्तम ने PK को एक MUN में represent किया और appreciation certificate भी जीता | इसके अलावा summer vacation में बड़े-बड़े स्कूल के बच्चे हमारा काम जानने के लिए लखनऊ आते थे और हम उनके साथ मिलकर action projects design और implement करते थे | हमें कई सारी  movies भी दिखाया जाता था, और movie के बाद उससे जुड़े topics पर discussion भी होता था, जिससे कि हमारे सोच का दाएरा बढ़े | अभी कुछ ही महीने पहले, जब ‘छपाक’ movie रिलीज़ हुई, तब हमें थिएटर में ले जा कर दिखाया गया, फिर उस movie से सम्बंधित discussion हमने Sheroes Cafe में किया, जहाँ हम acid attack survivors से भी मिले | मिलने के बाद हमने आपस में rape culture के ऊपर और भी बातें समझी और आपस में ध्यान भी रखने लग गये |

जनवरी 2020 में हम एक नए project में शामिल हुए, जहाँ period से जुड़े experience को ले कर  story circles करा रहे थे | अपने Female Youth Leaders और friends के real life अनुभवों को सुनना और उसके बारे में बातें करने से भी हमारे relationships में बहुत असर पड़ा | इससे हमें periods से जुड़ी अलग-अलग बातें पता चलीं, लोगों को क्या problem आती है, mood swings क्या होते हैं और कितना बुरा लगता है लड़कियों को जब उनको वाकई में किसी चीज़ पर गुस्सा आये तो लोग उसे mood swing बता के टाल देते हैं | Pain, periods से जुड़े myths का, romantic relationships पर क्या असर पड़ता है, etc पर open conversation हुए | इस में बहुत सारे लोग थे, girls और बॉयज सब एक जगह बैठ कर अपनी अपनी स्टोरी बता रहे थे और फैक्ट्स के बारे में भी बात हुई | इससे पीरियड्स हमारे लिए और भी समझाने की ज़रूरत वाली बात बन गई |

इस साल के Global Menstrual Hygiene Day के लिए, सारे Youth Leaders की मीटिंग्स करायी गयी कि हम लॉकडाउन और social media को बैलेंस करते हुए कैसे एक असरदार कैंपेन बना सकते हैं | सभी लोगों ने एक से बढ़कर एक ideas सोचे और शेयर किया | Angana दीदी ने पूरे समय, हम कितना जानते हैं और दुनिया को कितना बता सकते हैं उस हिसाब से गाइड लिया | हम लोगों ने agree किया कि tik-tok का दीवानापन अभी सबसे ज़्यादा चल रहा है, तो उसकेvideos बनiके हमने शेयर करा और podcasts भी बनाने के निर्णय लिया | इन दोनों के द्वारा, हम बहुत से टॉपिक कवर कर रहे हैं, जैसे- transman को period, एक girl जिसके period नहीं होते हैं लेकिन फिर भी वो एक ‘पूरी’ औरत है, disabled महिलाओं के periods etc | इन सबको अच्छे से बताने के लिए हमें पढ़ना भी बहुत पड़ रहा है | हम दोनों को इस campaign का manager इसीलिए बनाया गया क्योंकि हम दोनों ने सबसे ज़्यादा interest दिखाया था और अपने साइड से लगातार information ढूँढ रहे थे और दीदी से सवाल भी पूछ रहे थे | दूसरों तक बात पहुँचाने के चक्कर में हमने खुद बहुत कुछ सीखा |

फिर, इसी समय ‘Hidden Pockets Collective’ के टीम से हमारे दीदी की बात हुई और Hidden Pockets Collective  के team members  ने हमारा interview लिया और लोगों तक हमारी बात पहुंचाई | हम इन सब के लिए बहुत आभारी हैं | 

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